
कविता
दीया हूँ मैं
बहुत जला हूँ मैं , तभी तो तुम देख पाए.. वो राह , जिस पर चलकर.. पायी मन्जिल तुमने | जीता दिलों को तुमने || तेल मेरा थ…
बहुत जला हूँ मैं , तभी तो तुम देख पाए.. वो राह , जिस पर चलकर.. पायी मन्जिल तुमने | जीता दिलों को तुमने || तेल मेरा थ…
तन्हा था विशाल सागर , एक रात, रूप की गागर . छलकती हुई चांदनी , गाती हुई कोइ रागिनी . आई थी उधर से , नि…