
हम लोग गंगा स्नान करने को आतुर थे | झट से सभी ने कपडे उतारे, गंगाजल से आमचन किया और फिर गंगा मैया की गोद में प्रवेश किया | बहुत ही ठण्डा जल था | एक बार को तो सारे शरीर में झनझनाहट सी हुई लेकिन एक दुबकी लगाते ही सारी थकान भी दूर हो गयी | काफी देर तक तक हम शीतल जल में छोटे बच्चों की तरह खेलते रहे | हर की पैडी से बाहर आकर हमने खाना खाया और आराम करने के लिए एक थोड़ी सी खाली जगह पर लेट गये |
कभी किसी समय स्वयं श्रीहरि विष्णु जी ने जहाँ अपने चरण रखे थे | उसी धरती पर लेटकर असीम सुख की प्राप्ति हुयी |जब हम आराम करके उठे तो दिन का चौथा प्रहर शुरू हो गया था | किसी ने प्रस्ताव रखा कि रात में यहाँ लेटकर क्या करेंगें ? क्यों न ऋषिकेश चला जाए और फिर वहाँ से रात में महादेव के धाम नीलकंठ की ओर प्रस्थान किया जाए ? सभी को प्रस्ताव बहुत पसन्द आया | हम तुरन्त ही ऋषिकेश की तरफ चल दिए | हरिद्वार से ऋषिकेश मात्र चौबीस किलोमीटर दूर है | मान्यता है कि रावण का वध करने के उपरान्त गुरु वशिष्ठ के परामर्श पर श्रीराम यहाँ पर तपस्या करने के लिए पधारे थे | यहाँ परबने हुए लक्ष्मण झूले से गंगा को पार करना बड़ा ही रोमांचक है | हरिद्वार की तुलना में यहाँ भीड़-भाड कम ही थी | ऊँचे पर्वतों से गंगा बड़े तीव्र वेग से पृथ्वी पर आती हैं | ऋषिकेशवह स्थान है जहाँ गंगा का भय उत्पन्न करने वाला वेग धीमा पड़ता है | ऋषिकेश में त्रिवेणीघाट बहुत प्रसिद्ध है | कहा जाता है कि यहाँ पर यमुना और सरस्वती की गुप्त धारायें भी यहाँ आकर गंगाजी से मिलती हैं | त्रिवेणी घाट से ही गंगाजी दायीं ओर मुड जाती हैं | यहाँ पर परमार्थ निकेतन और स्वर्गाश्रम भी दर्शनीय स्थल हैं | एक बार फिर मन गंगा-स्नान को आतुर हुआ तो हम लोग पुनः गंगा जी के पवित्र जल में उतर गये | यहाँ पर गंगा की धारा का प्रवाह हरिद्वार की अपेक्षा बहुत तीव्र अनुभव हुआ | यहाँ पर हमने नीलकंठ महादेव का अभिषेक करने के लिए गँगा जल लिया और फिर हमने मणिकूट पर्वत पर चढ़ने की तैयारी की | अँधेरा हो चुका था | हम लोग अपने -अपने थैले कन्धों पर लादे पहाड़ पर चढ़े जा रहे थे | रास्ते भर में घना अँधेरा था | बस सब लोग एक के पीछे एक चले जा रहे थे लगभग तेईस या चौबीस किमी का सफर होगा | हम बातें करते जा रहे थे कि काश हम लोग दिन में यह चढ़ाई कर रहे होते तो रास्ते के सुन्दर दृश्यों को निहार कर आनन्द लेते | लेकिन रात में तो कुछ भी दिखाई नही दे रहा था |
