गाँव वालों ने बहुत शोर – शराबा किया तो जिलाधिकारी महोदय को जनता के बीच आना ही पड़ा . बोले- “हमने पहले ही राशन वितरण के दिन अपने लेखपाल को दुकान पर उपस्थित रहने का आदेश दिया है फिर भी अगर आप लोग संतुष्ट नहीं हैं तो हम एक और सरकारी मुलाजिम को वहाँ लगा देते हैं .”
लोग वापस अपने घरों को लौट गए .
दो दिन बाद मैं पास के कस्बे में चाय दुकान की पर बैठा था . मैंने चाय खत्म ही की थी की राशन डीलर और लेखपाल महोदय दुकान के अंदर आये . डीलर बोला-“ आपने दूसरे आदमी को आने ही क्यूँ दिया ?, कुछ किया क्यूँ नहीं ? हर महीने आपको खुश कर देता हूँ फिर भी ?”
लेखपाल महोदय बोले देखो भई –“ मैंने कोशिश तो की थी , अगर मै ज्यादा जोर कोशिश करता तो मुझे भ्रष्ट मान लिया जाता और जिलाधिकारी महोदय भी मुझपे शक करते .”
राशन डीलर महोदय के चहरे पे चिंता की लकीरे साफ़ झलक रही थी .
अब दूसरे आदमी के लिए भी हर महीने पैसों जुगाड करना पड़ेगा .
- जय कुमार