
कविता
सागर और चांदनी
तन्हा था विशाल सागर , एक रात, रूप की गागर . छलकती हुई चांदनी , गाती हुई कोइ रागिनी . आई थी उधर से , नि…
तन्हा था विशाल सागर , एक रात, रूप की गागर . छलकती हुई चांदनी , गाती हुई कोइ रागिनी . आई थी उधर से , नि…
गाँव वालों ने बहुत शोर – शराबा किया तो जिलाधिकारी महोदय को जनता के बीच आना ही पड़ा . बोले- “हमने पहले ही …
दोनो तरफ़ वाहनों की लम्बी कतार थी. ज़ाम लगाने वालों मे अधिकांश महिलायें थी. शेष नवयुवक थे. दुपहिया वाहनो…